Q-1. निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए:
1. अत्यभ्य
=> सांसारिक भोग-विलास अत्यभ्य सुख देते है|
2. चाकचिक्य
=> देहाती मित्र मुंबई की चाकचिक्य पर मुग्ध हो गया|
3. कनकाभ
=> राजमहल के कनकाभ शिखर हमारा ध्यान आकृष्ट कर रहे थे|
4. तप:क्षीण
=> शाप के प्रभाव से मुनि तुरंत तप:क्षीण हो गए|
5. क्लेश
=> पुत्रके अनुचित व्यवहार से पिता को बड़ा क्लेश हुआ|
6. झंझावात
=> बर्फीले झंझावातोमें भी सैनिक देश की रक्षा करने में डटे हुए है|
7. फणिबंध
=> पता नहीं, संकट के इस फणिबंध से हमें कौन छुडाएगा?
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Q-2. एक-दो वाक्योंमें उत्तर लिखिए:
1. वैभव से क्या प्राप्त होता है?
=> वैभव से हमें चिंताए और थोड़ी हंसी-खुशी प्राप्त होती है|
2. धन-संपत्ति किसलिए है?
=> धन संपत्ति परोपकार के लिए है|
3. सुख-समृद्धि के अधीन मानव का क्या होता है?
=> सुख-समृद्धि के अधीन मानव का तेज प्रभाव दिन प्रतिदिन क्षीण होता जाता है|
4. फणिबंध से कौन छुड़ाते हैं?
=> फणिबंध से गरुड़ जैसे साहसी और वीर पुरुष ही छुड़ाते हैं|
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Q-3. निम्नलिखित पंक्तियों का भावार्थ लिखिए:
1. वैभव विलास की चाह नहीं, अपनी कोई परवाह नहीं,
बस यही चाहता हूं केवल, दान की देव सरिता निर्मल,
करतल से झरती रहे सदा,
निर्धन को भर्ती रहे सदा |
=> कर्ण श्री कृष्ण से कहता है, केशव! आप मुझे राज्य देने का लालच दे रहे हैं, परंतु मैं वैभव विलास का जीवन पसंद नहीं करता| मुझे कोई चिंता नहीं है| मुझे दान देने में रुचि है| इसलिए मैं चाहता हूं कि मैं गरीबों को हमेशा दान देता रहूं और उनके दु:ख दूर करूँ|
2. मै गरुड़, कृष्ण! में पक्षीराज, सिर पर न चाहिए मुझे ताज,
दुर्योधन पर है विपद घोर, सकता न किसी विष किसी छोड़,
रणखेत पटाना है मुझको,
अही पास काटना है मुझको|
=> कर्ण श्री कृष्ण से कहता है कि इस समय मेरी स्थिति गरुड़ पक्षी के समान है| मुझे राजमुकुट नहीं पहनना है| इस समय दुर्योधन भारी संकट में है| युद्ध रूपी नागपाश ने उसे जकड़ रखा है| मुझे दुर्योधन के इस नागपाश को काटना है| दुर्योधन को युद्ध में विजय दिलाना है| मुझे गरुड़ की तरह अपना दायित्व निभाना है|
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Q-4. टिप्पणी लिखिए:
1. कर्ण की अभिलाषा
=> कर्ण दानी पुरुष है| वह प्रतिदिन जरुरतमंद लोगों को दान देता है| उसे राज्य पाने की इच्छा नहीं|वैभव पाकर भोग-विलास बिना उसके स्वभाव के विरुद्ध वह दयालु और उदार वृति का है| गरीबो के प्रति उसके मन में करुणा है| उसकी यही अभिलाषा है की वह अपनी दानवृति से निर्धनों का दू:ख दूर करता रहे|
2. कर्ण का मित्र-धर्म
=> कर्ण का जीवन अन्याय और अपमान से भरा हुआ था| दुर्योधन ने सम्मान दिया और मित्र बनाया| कर्ण उसका उपकार कभी भूल नहीं पाया| युध्द से पहले श्रीकृष्ण उसे अपने पक्षमें लेने गए| उन्होंने उसे राज्य देने का प्रलोभन भी दिया| परन्तु कर्ण ने उनका अस्वीकार कर दिया| उसने दुर्योधन का साथ छोडने का स्पष्ट इनकार कर दिया| इस प्रकार कर्ण ने दुर्योधन की प्रति अपने मित्र-धर्म का पालन किया|
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Q-5. विरुध्धार्थी शब्द लिखिए:
1. निर्मल
=> मलिन
2. निर्धन
=> धनवान
3. प्रभूत
=> कम
4. कोमल
=> कठोर
5. अमृत
=> विष
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Q-6. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द कोष्ठक से ढूंढकर उन शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए:
(सुखोपभोग, हथेली, प्रचुर, दरब, आँधी, पानी, गरल, चट्टान)
1. सुखोपभोग
=> विलास, वाक्य: राजा सदा विलास में डूबा रहता था|
2. हथेली
=> करतल, वाक्य: बच्चे का करतल देखकर ज्योतिषी ने उसका भविष्य बता दिया|
3. प्रचुर
=> प्रचूर, वाक्य: वह गांव में रहता था, पर उसके पास प्रचूर संपत्ति थी|
4. दरज
=> दरार, वाक्य: गरुड़ पहाड़ों की दरार में निवास करता है|
5. आँधी
=> अंधड़, वाक्य: सारी रात अंघड ने कहर मचा दिया|
6. पानी
=> वारि, वाक्य: सदा स्वच्छ वारी पीना चाहिए|
7. गरल
=> विष, वाक्य: देखते ही देखते सांप का विष बच्चे के शरीर में फैल गया|
8. चट्टान
=> शैल, वाक्य: शैल उस पार झरना था|
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Q-7. अंदाज अपना-अपना| अपना मत स्पस्ट कीजिए:
1. यदि कोई जरुरतमंद इन्सान आपसे मदद माँगे तो आप क्या करेंगे?
=> सबसे पहले में उसकी जरूरते पूछूँगा| यदि मुझे जरुरत सच्ची लगी तो में मदद करूँगा| मदद करने में यदि लोगों की आवश्यकता हुई तो उनका सहयोग लेने में मै संकोच नहीं करूँगा|
2. आपको पता चला की आपका दोस्त संकट में फँसा सुआ है, तो आप क्या करेंगे?
=> मित्र की मदद करना मेरा कर्त्तव्य है| इस कर्त्तव्य पालन करके ही मै मित्र-धर्म की निभा सकता हूँ| इसलिए संकट में पड़े हुए मित्र को संकट से छुडाने में मै कोई कसर न रखूँगा|
3. आपके पास जरुरत से ज्यादा धन-संपति है, तो आप क्या करेंगे?
मै उसका उपयोग परोपकार में करूँगा| में वहाँ के अनाथआश्रम में चीजे खरीदकर ला दूँगा| गरीबो को अन्नदान दूँगा| इस प्रकार अपने पास जरुरत से ज्यादा धन-संपति होने पर मै उसका उपयोग दूसरो के दू:ख दूर करने में करूँगा|
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