Q-1. निम्नलिखित प्रश्नों के एक-दो वाक्यों में उत्तर लिखिए:
1. महंत ने नगर की असलियत जानने पर क्या फैसला लिया?
=> महंत ने नगर की असलियत जानकर वहाँ न रहने का निर्णय किया ।
2. अंधेरी नगरी में भाजी और खाजा किस भाव से बिकता था?
=> अँधेरी नगरी में भाजी और खाजा दोनों टके सेर भाव से बिकता था ।
3. कसाई ने भेड़ किससे मोल ली थी?
=> कसाई ने भेड़ एक गड़रिये से मोल ली थी ।
4. महंत ने गोवर्धनदास को क्या सलाह दी थी?
=> महंत ने गोवर्धनदास को उस नगर में न रहने की सलाह दी थी, क्योकि जहाँ टका सेर भाजी और टका सेर खाजा मिलता हो ।
5. राजा फाँसी चढ़ने को क्यों तैयार हो गया?
=> राजा फाँसी चढ़ने को तैयार हो गया, क्योकि महंत ने कहा था की उस शुभ घड़ी में जो मरेगा वह सीधे स्वर्ग में जाएगा ।
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Q-2. निम्नलिखित प्रश्नों के पाँच-छ: वाक्यों में उत्तर लिखिए :
1. गोवर्धनदास ने खुश होकर अंधेरी नगरी में ही रहने का फैसला क्यों लिया?
=> गोवर्धनदास में महंत जैसी दूरदृष्टि नहीं थी । उसे बस अपना पेट भरने की चिंता थी । अँधेरी नगरी में टके सेर मिठाई मिलती थी । गोवर्धनदास को मिठाई खाने का शौक था । अँधेरी नगरी में रहकर वह कम पैसो में भी भरपेट मिठाई खा सकता था । इस लिए उसने अँधेरी नगरी में ही रहने का फैसला लिया ।
2. बकरी की मौत के लिए किस-किसको अपराधी ठहराया गया? राजा ने किसे-किसे और क्यों फाँसी चढ़ाने का फैसला किया?
=> बकरी की मौत के लिए कल्लू बनिया, दीवार बनानेवाले कारीगर, चुनेवाले, भिस्ती, कसाई, गड़रिए और कोतवाल को अपराधी ठहराया गया । अंत में राजा ने कोतवाल को फाँसी पर चढाने का फैसला लिया ।
3. गोवर्धनदास पर पछताने की बारी क्यों आ गई?
=> गुरु महंत का कहना न मानकर गोवर्धनदास ने अँधेरी नगरी में रहने का निर्णय किया था । उसने सोचा की कम खर्च में अधिक मजे के साथ वही रह सकता था । परंतु जब दुबला - पतला होने के कारण कोतवाल फाँसी से बच गया, तब सिपाहियों ने गोवर्धनदास को पकड़ा । सिपाहियों को न्याय अन्याय और दोषी और निर्दोष की परवाह नहीं थी । उन्हें तो फाँसी पर चढ़ने लायक व्यक्ति चाहिए था । उनके द्वारा पकडे जाने पर गोवर्धनदास को पछताने की बारी आई ।
4. महंत गोवर्धनदास की जान बचाने में सफल कैसे हो गए?
=> गोवर्धनदास को फाँसी होनेवाली थी, तब गुरु वहाँ पहुँच गए । गुरुने शिष्य के कान में कुछ कहा फिर आपसमे झगड़ने लगे । राजा, मंत्री सब वहाँ पहुँच गए । पूछने पर महंत ने बताया की उस मुहूर्त पर फाँसी चढ़नेवाला सीधा स्वर्ग जाएगा । स्वर्ग के लालच में चौपट राजा खुद फाँसी पर चढ़ गया । इस प्रकार महंत गोवर्धनदास की जान बचाने में सफल हो गए ।
5. पाठ को ‘अंधेरी नगरी’ शीर्षक क्यों दिया गया?
=> ‘यथा राजा तथा प्रजा’ कहावत चरितार्थ करता है ।एकांकी में दीवार गिरने के अपराध में कई लोगो पर दोष आ जाता है ।, पर सब बचाव में सफल हो जाते है । अंत में कोतवाल दोषित साबित होता है । जिसका इस घटना से संबंध नहीं । अब कोतवाल की पतली गर्दन के कारण फंदे के लायक नहीं है । इसीलिए गोवर्धनदास को पकड़ा जाता है । अंत में महंत की चतुराई से राजा स्वयं फाँसी पर चढ़ जाता है । इस प्रकार अँधेरी नगरी सचमुच अँधेरी नगरी है । यहाँ सच और झूठ में कोई भेद नहीं किया जाता । यहाँ न कोई कानून है, न व्यवस्था, अपराध कोई करता है और दंड किसी और को दिया जाता है । इसीलिए इस पाठ को ‘अँधेरी’ शीर्षक दिया गया है ।
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Q-3. आशय स्पष्ट कीजिए :
1. अँधेरी नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा।
=> मुर्ख राजा के राज्य में अच्छे - बुरे, साधारण - विशेष, उचित - अनुचित में कोई अंतर नहीं होता । खाजा जैसी महँगी मिठाई भी भाजी के भाव बेचीं जाती है । न्याय - अन्याय में भी कोई फर्क नहीं रखा जाता । राज्य में अँधेरे ही अँधेरे दिखाई देता है ।
2. राजा के जीतेजी और कौन स्वर्ग जा सकता है? हमकों फाँसी चढ़ाओ, जल्दी करो।
=> राजा को बताया गया की फाँसी पर चढ़ने की वह बहुत शुभ घड़ी थी । उस समय फाँसी चढानेवाला सीधा स्वर्ग जाएगा । मुर्ख राजा स्वर्ग के लालच खुद महंत की लांच में फँसकर फाँसी पर चढ़ने के लिए तैयार हो गया । उसकी मूर्खता ही उसका राजहठ बन गई ।
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Q-4. सही शब्द चुनकर वाक्य पूर्ण कीजिए :
(1) महंत अंधेरी नगरी में क्षणभर रहना नहीं चाहते ? (यथासमय, क्षणभर)
(2) मंत्री और नौकर लोग यथास्थान बैठे हैं । (इकठ्ठा, यथास्थान)
(3) कोतवाल तूने सवारी धूमधाम से क्यों निकाली ? (मीठाई, सवारी)
(4) मुझे अपने शिष्य को अंतिम उपदेश देने दो । (शिष्य, गुरु)
(5) शुभघड़ी में जो मरा, सीधा स्वर्ग जाएगा । (महल, स्वर्ग)
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