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Monday, 25 May 2026

Std 9 Hindi Ch.17 Tulsi Ke Pad Svadhyay Solution || तुलसी के पद ||

 


Q-1. एक वाक्य में उत्तर लिखिए :


1. तुलसीदास के मत से कौन पतितपावन हैं?

=> तुलसीदास के मत से उनके स्वामी श्रीराम पतितपावन है l


2. भगवान को अति दीन कैसे लगते हैं?

=> भगवान को अति दिन प्रिय लगते है l


3. भगवान ने हठ करके किनका उद्धार किया?

=> भगवान ने हठ करके पक्षी, मृग, व्याघ, पाषाण, वृक्ष और यवन का उद्धार किया l


4. माया के प्रति विवश होकर कौन-कौन सोचते हैं?

=> देवता, राक्षस, मुनि, नाग, मनुष्य - ये सब माया के प्रति विवश होकर सोचते है l


5. प्रभु दानी है तो कवि क्या है?

=> प्रभु दानी है, तो कवि भिखारी है l


6. कवि ‘पाप पुंजहारी’ किसे कहते हैं?

=> कवि ‘पाप पुंजहारी’ भगवान श्रीराम को कहते है l


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Q-2. विस्तार सहित उत्तर लिखिए :


1. तुलसीदासजी प्रभु के चरणों को छोड़कर कहीं ओर क्‍यों नहीं जाना चाहते हैं?

=> तुलसीदासजी के अनुसार प्रभु श्रीराम पतितपावन है l वे दीन - दु:खी जनो के प्रेमी है l उन्होंने अनेक दुष्टो का उद्धार किया है l पक्षी, मृग, व्याघ, पाषाण, वृक्ष और यवन का उद्धार करने में भी उन्होंने देर नहीं की l बाकी देवता, मुनि और मनुष्य आदि माया के वशीभूत है l उनसे संबंध जोड़ने का अर्थ नहीं l श्रीराम जैसी दया और सामर्थ्य और किसी में नहीं है l इसीलिए तुलसीदासजी अपने प्रभु के चरणों को छोड़कर और कही जाना नहीं चाहते l


2. तुलसीदास ने अपने और भगवान के बीच कौन-कौन से संबंध जोड़े है? क्‍यों?

=> तुलसीदासजी भगवान दयालु है तो वह दीन अर्थात दया के पात्र है lयदि प्रभु दानी है तो वे भिखारी है l प्रभु पापो को नाश करते है, तो तुलसीदास जैसे कोई पापी नहीं l प्रभु अनाथो के नाथ है, तो वह उसके जैसा कोई अनाथ नहीं l प्रभु दुःख दूर करने वाले है तो उसके जैसा कोई दुःखी नहीं है l प्रभु बहम है तो तुलसीदास जिव है l प्रभु स्वामी है, तो तुलसीदास सेवक है l भगवान ही तुलसी के माँ - बाप, पिता, गुरु, सखा आदि सबकुछ है lइस तरह भगवान से संबंध बनाकर किसी भी तरह से भगवान् की शरण पाना चाहते है l


3. ‘तोहि - मोहि नाते अनेक, मानिए जो भावे’ का भावार्थ स्पष्ट कीजिए ।

=> तुलसीदास ने भगवान से अपने अनेक नाते बताए है l वे भगवान से कहते है की जो नाता आपको स्वीकार हो उस नाते से मेरे से जुड़े रहे l वे जानते है की जबतक एक निश्चित नाता नहीं होता तब तक भक्ति करने में आनंद नहीं आता l एक निश्चित सम्बन्ध से पुकारने में सरलता होती है और अपनत्व बढाने को मदद मिलती है l इस लिए तुलसीदास प्रार्थना करते है की वे उनसे कोई एक निश्चित नाता बनाकर उन्हें अपना ले l


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Q-3. भावार्थ स्पष्ट कीजिए :


1. देव, दनुज, मुनि, नाग, मनुज, सब मायाबिबस बिचारे । तिनके हाथ दासतुलसी प्रभु, कहा अपनपौ हारे ॥

=> हे भगवान राम ! देवता, राक्षस, मुनि, नाग, वृक्ष, यवन देवता आदि सब माया के वशीभूत है। इनमे मुझ जैसा के प्रति अपनापन नहीं होता। इससे सहायता करने की आशा करना व्यर्थ है। हे प्रभु मायारचित केवल आप है। मुझ जैसा भक्त का ख्याल केवल आप ही रख सकते है। आप के सिवा मैं और किसी की शरण में जाने की बात सोच नहीं सकता।


2. नाथ तू अनाथ को, अनाथ कौन मोंसो ? मो समान आरत नहिं, आरतिहर तोसो ॥

=> तुलसी भगवान से कहते है की जिनका संसार में कोई रक्षक नहीं है, उनकी रक्षा आप ही करते है । मेरे जैसा और कोई अनाथ नहीं है । इसी लिए आपको ही मेरी रक्षा करनी होगी, मेरे समान कोई दुःखी नहीं है। अपने दुःख दूर करने के लिए मैं आपको ही पुकारूँगा, क्योकि आपके समान दुःखियों के दुःख हरनेवाला दूसरा कोई नहीं है ।


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Q-4. समानार्थी शब्द लिखिए ।


अधम - नीच

दनुज - राक्षस

मनुज - मनुष्य

पातकी - पापी

आरत - दुःखी

चेरो - दास


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Q-5. शब्दसमूह के लिए एक शब्द दीजिए ।


(1) पापियों का उद्धार करनेवाला ईश्वर -   पापोद्धारक / पतित पावन

(2) जिसकी रक्षा करनेवाला कोई न हो - अनाथ


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