Q-1. एक - एक वाक्य में उत्तर दीजिए :
1. बार-बार कौन गरजता है?
=> बार-बार समुद्र गरजता है ।
2. प्रकृति के तत्व क्या पूछ रहे हैं?
=> प्रकृति के तत्व पूछ रहे की विरो का वसंत कैसा होना चाहिए ।
3. बधु - वसुधा में क्या परिवर्तन आया?
=> वसुधारूपी - वधु का अंग - अंग पुलकित हुआ है ।
4. कवयित्री कुरुक्षेत्र से क्या कहते हैं?
=> कवयित्री कुरुक्षेत्र से कहते हैं की तुम जागकर देशवासियों को अपने अनुभवों के बारे में बताओ ।
5. कवयित्री की कलम की क्या विशेषता है?
=> कवि की कलम की विशेषता है की विरो का वसंत कैसा हो, यह कुछ खुलकर लिखने की उसे अनुमति नहीं है ।
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Q-2. निम्नलिखित प्रश्नों के दो - तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए :
1. वीरों का कैसा है वसन्त ? ऐसा कौन - कौन पूछ रहे है ?
=> हिमालय पर्वत, सागर, पूर्व - पश्चिम दिशाए, पृथ्वी और आकाश तथा क्षितिज भी यही पूछ रहे है ।
2. ‘कह दे अतीत अब मौन त्याग’ ऐसा कवयित्रीने क्यों कहा है ?
=> देश के इतिहास में वीरता - पराक्रम दिखानेवाले शूरवीर हो गए है । इनसे हम स्वाधीनता और गौरव की रक्षा के लिए बलिदान के पाठ सीखते है । कवयित्री ने ‘कह दे अतीत अब मौन त्याग’ ऐसा कहा है ।
3. किन ऐतिहासिक घटनाओं के आधार पर कवयित्रीने ‘वीरों का वसन्त' बताया है ?
=> हनुमानजी का लंकादहन, कुरुक्षेत्र में महाभारत युद्ध, हल्दी - घाटी में महाराणा प्रताप तथा अकबर का युद्ध, तानाजी द्वारा सिंहगढ़ विजय ये हमारे इतिहास की बहुत प्रेरक घटनाएँ है । इन्ही के आधार पर कवयित्री ने ‘वीरों का वसन्त कैसा हो’ यह बताया है ।
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Q-3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए :
1. “वीरों का कैसा है वसन्त” इस पंक्ति को अपने शब्दों में कविता के आधार पर समझाइए ।
=> वसन्त ऋतु प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण सबसे सुन्दर ऋतु मानी है । सुन्दर, सुगंधित फूल, भौरो का गुंजन, तितलियाँ, सुहावनी हवा इस ऋतु की विशेषताएँ है । पर यह वीरों का वसन्त नहीं है । वीरों का वसंत वह है । जिसमे अन्याय स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए संघर्ष होता है । जिसमे अन्याय और अधर्म का नाश करने के लिए शूरवीर हँसते - हँसते अपना बलिदान देते है ।
2. हल्दी घाटी और सिंहगढ़ से कवि का क्या तात्पर्य हैं ?
=> सम्राट अकबर राजपूत राजाओं को पराधीन करना चाहता था । पर सफल नहीं हुआ । महाराणा प्रताप अंत में हल्दी घाटी के मैदान में अकबर के साथ भयंकर युद्ध हुआ । इसी प्रकार सिंहगढ़ पर अधिकार करने के लिए शिवाजी महाराज के वीर सरदार तानाजी ने उस पर आक्रमण किया अंत में सिंहगढ़ हाथ में आ गया, पर वीरता दिखाते हुए तानाजी मालसुरे शहीद हो गये। कवयित्री कहना चाहती है की हल्दी घाटी और सिंहगढ़ के संघर्ष बताते है की वीरों का वसन्त कैसा होना चाहिए ।
3. “है कलम बाँधी स्वच्छन्द नहीं” - ससंदर्भ समजाइए ।
=> वीरों का कैसा हो वसन्त ? यह कविता तब लिखी गई थी जब देश पर अंग्रेजो का शासन था । अंग्रेजी सत्ता ने देश में दमनचक्र चला रखा था । उस समय अंग्रेजो के अन्याय के विरुद्ध लिखना अपराध माना जाता था । और उसे कड़ी सजा दी जाती थी । उनकी रचनाऍ जप्त कर ली जाती थी । उसी संदर्भ में कवयित्री लिखती है की मेरे लिखने पर पाबंधी है । मैं चाँहू तो भी कुछ खुलकर लिख नहीं सकती ।
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