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Sunday, 24 May 2026

Std 9 Hindi Ch.14 Yug Aur Me Svadhyay Solution || युग और मैं ||

 


Q-1. निम्नलिखित प्रश्नों के उतर एक-एक वाक्य में लिखिए :


1. ‘युग और में ' कविता के रचनाकार का नाम बताइए ?

=> ‘युग और में' कविता के रचनाकार नरेन्द्र शर्मा है l


2. गगन और धरती से क्या हो रहा है ?

=> गगन से आगे के गोले बरस रहे है और धरती से ज्वालाऐ उठ रही है l


3. सात समंदर में क्या हो रहा है ?

=> सात समंदर में हिंसा की आग से पानी खौल रहा है l


4. काव्य शीर्षक का समानार्थी शब्द दीजिए l

=> कविता और जमाना


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Q-2. निम्नलिखित प्रश्नों के उतर दो-तीन वाक्यों में लिखिए :


1. बुद्धि और हाथ किस कार्य के लिए है ?

=> बुद्धि का कार्य संसार के अज्ञान को दूर करके छाई जड़ता मिटाना है l हाथो का काम बुद्धि के मागदर्शन में पृथ्वी को स्वर्ग की तरह सुंदर बनाना है l


2. ज्ञान और पृथ्वी की कैसी स्थिति हो रही है ?

=> ज्ञान अपनी गहराई खो रहा है l पृथ्वी दुःख के समुद्र में डूब रही है l


3. मानव की क्या स्थिति हो गई ?

=> मानव ईश्वर बनने का प्रयास कर रहा था l उसे सारी सृष्टि पर अपना नियंत्रण स्थापित करना था l परंतु आज वह छोड़कर अपने ही विनाश में लग गया है l


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Q-3. निम्नलिखित प्रश्नों के उतर पांच-छ वाक्यों में लिखिए :


1. कवि के हदय में कैसी व्यथा है ?

=> कवि संसार में हो रहे संहार के द्रश्यो को देखकर दुखी है l ऐसी स्थिति में उसकी चिंता करनेवाला कोई नहीं है l उसकी करुण कथा को सुनने में किसी की दिलचस्पी नहीं है l कवि अपनी पीड़ा के धूंट पी लेने में ही भलाई समझता है l सारी दुनिया को दुःख में डूबकर समुद्र में डूब जाना बेहतर मानता है l उसे लगता है की ऐसी स्थिति में उसका कोई भी निशाना सही बैठ ने वाला नहीं है l इस प्रकार कवि के ह्दय में धोर दुःख और निराशा है l


2. ‘युग और मै’ कविता का संदेश लिखिए l

=> ‘युग और मै’ कवि ने संसार की स्थिति के संदर्भ में अपनी स्थिति देखी है l कवि कहता है की प्राय:मनुष्य अपनी मामूली पीड़ा को भी बड़ी मानने लगता है l उसे लगता है की उसके अस्तित्व का कोई महत्व नहीं है l प्रस्तुत कविता के माध्यम से कवि दुनिया की स्थिति को देखकर मनुष्य को कभी हताश और निराश नहीं होना चाहिए l उसे आत्मविश्वासपूर्वक पूर्ण जीने का प्रयत्न करना चाहिए l


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Q-4. संदर्भ सहित स्पस्टीकरण कीजिए :


1. मानव को ईश्वर बनना था निखिल सृष्टि वश में लानी , काम अघुरा छोड़ कर रहा आत्मघात मानव ज्ञानी l सब झूठे हो गए, निशाने तुम मुझसे छूटे तो क्या l

=> इस पंक्ति में मनुष्य किस तरह अपनी प्रगति की राह से भटककर गुमराह हो गया है l मनुष्य ने विज्ञान के क्षेत्र में अनोखी सिद्धिर्या प्राप्त कर ली है l इनके बल पर वह स्वयं को ईश्वर समझने लगा l ऐसी सिद्धियोंवाले देश सारी दुनिया पर अपना अधिकार करने के फेर में पड़ गए l उन्होंने ईश्वर बनने की राह छोड़ दी और अपना ही विनाश करने लगे l कवि कहता है की जब सबने अपनी राह छोड़ दी तो में अगर भटक गया तो इसमे मेरा क्या दोष l


2. जाने कब तक घाव भरेगे इस घायल मानवता के? जाने कब तक सच्चे होगे सपने सबकी समता के? सब दुनिया पर व्यथा पड़ी है मेरी ही क्या बड़ी व्यथा l

=> इस पंक्ति में कवि ने दुनिया के भविष्य के प्रति निराशा प्रकट की है l कवि कहते है संसार में चारो और विछास की स्थिति है l एक-दुसरे प्रभुत्व की होड़ में है l ऐसी स्थिति में मनुष्य की बराबरी (समता) की बाते केवल बाते ही रहेगी l जब तक संसार में शांति- भाईचारा की भावना नहीं होगी तब तक मनुष्य का वातावरण नहीं बनेगा l बिना मानव-मानव की समानता का आदर्श कभी व्यवहार में नहीं आ सकेगा l कवि कहते है की जब सारी दुनिया गैरबराबरी की पीड़ा से परेशान है तो में अपनी पीड़ा की क्यों चिंता करू l


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Q-5. विरुधार्थी शब्द बताइए :


1. हस्ती

=> नास्ति


2. अंगार

=> ओला


3. समुंदर

=> तालाब


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Q-6. निम्न शब्दों के समानार्थी शब्द देकर उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए :


1. अनगिनत  – असंख्य

=> वाक्य – आज अनगिनत मनुष्य बेकार है l


2. गगन  – आकाश

=> वाक्य – गगन में बादल छाए हुए है l


3. दुनिया  – संसार

=> वाक्य- दुनिया बहुत बड़ी है l


4. निखिल  – संपूर्ण

वाक्य- निखिल विश्व में कई अजायाबियो है l


5. तहस- नहस  –
बर्बाद

=> वाक्य- दंगे में सारा गाँव तहस-नहस हो गया l


6. आपा  – अभिमान

=> वाक्य- सुधीर को अपना आपा छोड़ देना चाहिए l


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Q-7. ऐसी स्थिति में आप क्या कर सकते है ?


1. जब मौत सभी को निगल रही हो ? चारो और अत्र-तत्र सर्वत्र आग लगी हो, हत्याएँ हो रही हो l

आज बमों के रूप में आकाश से आग के गोले बरस रहे है l धरती से आग की ज्वालाएँ निकल रही है l जब सभी मौत के मुँह से जा रहे है तब में अपने बारे में क्या बताऊ जब संसार में हत्याएं हो रही है l और जब सारा संसार दुःख से पीड़ित है तो मेरा दुःख – दर्द किस गिनती में है l


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