Q-1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :
1. कवि की दृष्टि में सर्वाधिक महान कौन है ?
=> कवि की दृष्टी में सर्वाधिक महान मनुष्य है ।
2. आप क्या-क्या कर सकते हैं ?
=> एक विध्यार्थी होने के नाते मैं वे सारे काम कर सकता हूँ जो मेरे कार्य-क्षेत्र में आते है ।
3. अन्य जीवों से मनुष्य महान कैसे है ?
=> अन्य जीव अब भी बहुत पिछड़े है जबकि मनुष्य ने जल, थल और नभ पर भी अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया है ।
4. धरती-सा धीर किसे कहा गया है ?
=> धरती-सा धीर मनुष्य को कहा गया है ।
5. ‘धरती की शान’ कविता के रचयिता कौन हैं ?
=> ‘धरती की शान’ कविता के रचयिता पंडित भरत व्यास है ।
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Q-2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सविस्तार लिखिए :
1. कविता में कवि ने किन प्राकृतिक दृश्यों का चित्रण किया है ? कैसे ?
=> कविता में पहाड़, नदियाँ, धरती, आकाश, हवा जैसे प्राकृतिक दृश्यों का चित्रण किया है । कविने मनुष्य को असीम शक्तियाँ दी है । मनुष्य चाहे तो पर्वत को फोड़ सकता है । वह चाहे तो नदियों के प्रवाह को मोड़ सकता है । वह ठान ले तो धरती और आकाश को मोड़ सकता है । मनुष्य पवन-सा गतिमान है । इसीलिए वह आकाश में ऊँची-सी ऊँची उड़न भरने में समर्थ है ।
2. प्रस्तुत कविता में मनुष्य के प्रति किस भाव की अभिव्यक्ति हुई है, और उससे हमें क्या प्रेरणा मिलती है ?
=> मनुष्य सर्वशक्तिमान परमात्मा का रूप है । मनुष्य अजर - अमर प्राणी है । इससे प्रेरणा मिलती है की मनुष्य होने के कारण हमें अपने लक्ष्य ऊँचे रखने चाहिए । हमें किसी काम को कठिन - से कठिन कार्य करने में पीछे नहीं हटना चाहिए । हमें निराशा का शिकार होकर अपने आप को कभी अशक्त नहीं अनुभव करना चाहिए ।
3. ‘धरती की शान’ से कवि का क्या तात्पर्य है ? भाव स्पष्ट कीजिए ।
=> कवी का तात्पर्य मनुष्य की गौरवपूर्ण उपलब्धियाँ है । मनुष्य ने अपने बुद्धि से ऐसे अनेक कार्य कर दिखाए है, जो कभी असंभव माने जाते थे । मनुष्य ने सभ्यता और संस्कृति के ऊँचे आदर्श कायम किए है । उसने धरती पर के सभी प्राणियों में अपने को श्रेष्ठ साबित कर दिया है । इसीलिए कवि मनुष्य को ‘धरती की शान’ मानता है ।
4. मनुष्य के लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं है । काव्य के आधार पर अपने विचार प्रकट कीजिए ।
=> मनुष्य अत्यंत समर्थ प्राणी है । वह चाहे तो पहाड़ो को फोड़ सकता है । वह चाहे तो नदियों के प्रवाह की दिशा बदल सकता है । वह मिट्टी से अमृत निचोड़ सकता है । इस प्रकार मनुष्य हर असंभव कार्य को संभव बना सकता है ।
5. ‘धरती की शान’ कविता का केन्द्रीय भाव स्पष्ट कीजिए ।
=> ‘धरती की शान’ में कवि ने मनुष्य को सर्वशक्तिमान प्राणी कहा है । मनुष्य में अनेक शक्तियाँ है । इन शक्तियाँ को वे नहीं पहचानता इसीलिए वह असहाय बन जाता है। मनुष्य महाकाल बन जाता है । उसकी आवाज युग बदल सकती है । वह चाहे तो ऊँची उड़ान भर सकता है । इस प्रकार मनुष्य को अपनी शक्तियाँ पहचानने के लिए प्रेरित करना है ।
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Q-3. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए :
1. गुरु-सा मतिमान, पवन-सा तू गतिमान, तेरी नभ से भी ऊँची उड़ान है रे ।
=> मनुष्य के पास बुद्धि की कमी नहीं है । उसके पास बृहस्पति जैसी प्रतिभा है । वह वायु जैसी गति रखता है । वह चाहे तो आकाश से भी ऊँचा उठ सकता है । कवि चाहते है की यदि मनुष्य अपने अंदर छिपी शक्तियाँ को जाग्रत कर ले तो उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है ।
2. धरती की शान, तू भारत की संतान तेरी मुट्ठियों में बंद तूफान है रे ।
=> प्रत्येक भारतवासी महान है । उसमे अनंत शक्तियाँ छिपी है । वह अपने आपमें तूफान जैसी शक्ति रखता है । वह चाहे तो उसकी उपलब्धियाँ धरती का गौरव बन सकती है ।
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Q-4. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए :
(1) भूचाल - भूकंप
(2) हिमगिरि - हिमाचल
(3) वाणी - वचन
(4) तूफान - कहर
(5) अमृत - सुधा
(6) धीर - धैर्ययुक्त
(7) हिम्मत - वीरता
(8) नभ - आकाश
(9) निज - अपना
Q-5. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए :
(1) अमृत - जहर
(2) अम्बर - धरती
(3) अमर - मर्त्य
(4) धीर - अधीर
(5) वीर - कायर
(6) पाप - पुण्य
(7) जीवन - मृत्यु
Q-6. सही विकल्प चुनकर लिखिए :
1. तू जो चाहे पर्वत पहाड़ों को....
(A) मोड़ दे
(B) फोड़ दे
(C) तोड़ दे
(D) जोड़ दे
Answer: (B) फोड़ दे
2. पृथ्वी के लाल तेरा हिमगिरि-सा .......
(A) हाल
(B) भाल
(C) काल
(D) मिसाल
Answer: (B) भाल
3. ............... को तू जान, जरा शक्ति पहचान
(A) निज
(B) स्वयं
(C) खुद
(D) स्व
Answer: (A) निज
4. तू जो अगर हिम्मत से ............. ले
(A) ठान
(B) जान
(C) काम
(D) पहचान
Answer: (C) काम
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Q-7. काव्य - पंक्तियाँ पूर्ण कीजिए :
1. धरती ............... महान है ।
=> धरती की शान तू भारत की संतान
तेरी मुट्ठियों में बंद तूफान हे रे,
मनुष्य तू बड़ा महान है ।।
2. तू जो ............. उड़ान है रे ।
=> तू जो अगर हिम्मत से काम ले,
गुरु-सा मतिमान, पवन-सा तू गतिमान,
तेरी नभ से भी ऊँची उड़ान है रे ।।
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